सपनों को मिला आकाश…..

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Pooja Parashar

वह छोटी सी नन्ही परी, पर्यावरण प्रेमी, उसका सपना था कि वह अधिक से अधिक पौधे लगाए और प्रकृति को खुशहाल करें। उसका सपना पूरा हुआ। अपने बाल मित्रों व परिवार के सदस्यों के सहयोग से उसने एक दिन में एक हज़ार पौधे रोप
दिये।  लोग आश्चर्यचकित थे। यह आश्चर्य चरमोत्कर्ष पर तब पहुंचा, जब उस नन्ही परी का नाम “इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड” व “यू॰पी॰ बुक ऑफ रिकॉर्ड” में दर्ज हुआ। भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा उसे “प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बाल पुरस्कार – 2019” से नवाजा गया और “वर्ल्ड रिकॉर्ड यूनियन” ने भी उसको सम्मानित किया। यह नन्ही परी कोई और नहीं मेरठ की रहने वाली, छः वर्षीय ‘ईहा दीक्षित’ है। खेलने -कूदने और हंसने -ठिठोली करने की उम्र में पर्यावरण संरक्षण जैसे विषय पर उसका लगाव और समर्पण कब आ गया, उसे सही से नहीं पता। वह इतना जानती है कि जब वह किसी वृक्ष की ‘मौत’ देखती तो वह भाव -विह्वल हो जाया करती थी। ‘मौत’ का कारण प्राकृतिक आपदाएं रहीं हो या फिर हरियाली के भूचल पर कंक्रीट संपदा का प्रसार, उसे अच्छा नहीं लगता था।

उसने संकल्प लिया कि वह वृक्ष -संरक्षण के प्रति समर्पण भाव से कार्य करेगी। तब वह मात्र साढ़े पाँच वर्ष की थी। लेकिन उसने एक बड़ा सपना देख डाला। सपने को ‘पर’ देने के लिए उसने ‘ईहा स्माइल क्लब’ गठित किया। क्लब के सदस्य हम उम्र के बच्चे ही थे। क्लब के सदस्य बच्चे, प्रत्येक रविवार को पौधा रोपण करते और रोपित पौधों की देखभाल भी करते । अब तक ईहा ने अपने नेतृत्व में क्लब सदस्यों के सहयोग द्वारा साढ़े नौ हजार पौधे लगा चुकी है। आज भी वह अपने सपनों को और ऊंची उड़ान देने के लिए प्रयासरत है। नन्ही परी ईहा, दूसरों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुकी है।