हिम्मत से बसाया सपनों का अनोखा गाँव

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Mohini Tiwari
किस्सा महाराष्ट्र के लातूर जिले का है। प्रबुद्ध पत्रकार रवि बापटले ने अपने हौसलों से एक अनूठा गाँव बसाया जो आज समाज के लिए एक मिसाल बन चुका है। उन्होंने इस गाँव को नाम दिया- ‘एचआईवी यानी हैप्पी इंडियन विलेज।’ जितना दिलचस्प इस गाँव का नाम है उतनी ही दिलचस्प कहानी है इसके बसने की।

वर्ष 2007 में रवि की मुलाकात एक एचआईवी पॉजिटिव लड़के से हुई। गाँव वालों ने उसका बहिष्कार कर दिया था। वह दर-दर भटकने को मजबूर हो गया। एचआईवी पीड़ितों के प्रति समाज का यह क्रूर रवैया देखकर रवि का मन अशांत हो उठा। समाज द्वारा तिरस्कृत रोगियों को एक बेहतर जीवन देने के लिए रवि ने एक अलग गाँव बसाने का संकल्प किया। उन्होंने हासेगाँव स्थित अपनी जमीन बेचकर सेवालय आश्रम खोला तथा उस बच्चे को वहाँ ठहराया। धीरे-धीरे यह सिलसिला आगे बढ़ता गया। आस-पास के गाँवों के एचआईवी पॉजिटिव वहाँ आकर रुकने लगे। रवि ने उन सबकी देख-रेख का पूरा जिम्मा उठाया। इसप्रकार एचआईवी पीड़ितों के लिए एक अलग गाँव बस गया।

किंतु उनका यह सफर इतना आसान न था। गाँव वालों ने कई बार विरोध किया पर रवि ने हार नहीं मानी। उन्होंने सबको समझाया कि ‘एचआईवी कोई संक्रमित बीमारी नहीं है। यह छुआछूत से नहीं फैलती। एचआईवी से जूझ रहे लोगों को भी हम सब की तरह सामान्य जीवन जीने का अधिकार है। रोगी को अकेला तो नहीं छोड़ सकते।’ धीरे-धीरे यह बात लोगों को समझ आने लगी। उनकी कोशिश रंग लाई। वर्तमान में रवि के बसाए गाँव में 78 लोग रह रहे हैं। रवि उनके खाने-पीने व पढ़ने-लिखने का पूरा प्रबंध स्वयं करते हैं। 18 वर्ष से अधिक उम्र के वयस्कों को व्यवसायिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है जिससे वे आत्मनिर्भर बन सकें। गाँव में चारों ओर खुशनुमा माहौल है। बच्चे स्कूल जाते हैं। बड़े अपने प्रशिक्षण में व्यस्त रहते हैं। नियमित चेकअप के लिए डॉक्टर्स आते हैं। शाम को थियेटर चलता है। खास बात यह है कि रवि इन सब कामों के लिए कोई सरकारी अनुदान नहीं लेते।

एचआईवी गाँव के बाशिंदे किसी भी क्षेत्र में सामान्य जनों से कमतर नहीं हैं। यहां के बच्चे कहते हैं कि ‘आप तो कभी-कभी पॉजिटिव होते होंगे। हमारी तो पूरी जिंदगी ही पॉजिटिव है क्योंकि हम एचआईवी पॉजिटिव हैं।’ उनका जज्बा और जिजीविषा काबिल-ए-तारीफ है। रवि का मानना है कि उनके गाँव में पिछले 11 वर्षों से एक भी एचआईवी पॉजिटिव बच्चे की मौत नहीं हुई।वे एक ऐसे समाज का निर्माण करना चाहते हैं जहाँ उनके जैसी संस्थाओं की कोई आवश्यकता न हो। सभी बिना किसी भेदभाव के एकसाथ रहे। रवि की पहल ने यह सिद्ध कर दिया कि ‘अगर हौसले बुलंद है तो आसमाँ में भी छेद किया जा सकता है।’

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