डॉ राकेश कुमार सिंह, वन्य जीव विशेषज्ञ, साहित्यकार एवम कवि
माँ मुझे बचा लो, मां तुम कुछ बोलती क्यों नहीं, तुम कहाँ हो मां, मुझे कुछ भी दिखाई क्यों नहीं पड़ रहा, मेरे छोटे भाई-बहन की आवाज़ क्यों नहीं...
Dr. R.K Singh
आज से दो वर्ष पूर्व सुन्दरी एक अनाथ शावक थी।पैदा होने के साथ उसकी माँ द्वारा उसे त्यागने के पश्चात उसका लालन पालन मैंने किया। युवा होते ही उसको प्राणी उद्यान के बाड़े में छोड़ दिया गया।...
Dr. R.K. Singh
तीन मार्च 2022 की सुबह एक युवा तेंदुआ, जो कि सम्भवतः अपना नया क्षेत्र या यूं कहें कि साम्राज्य स्थापित करने निकला था, भटक कर मेरठ शहर के घनी आबादी वाले क्षेत्र पल्लवपुरम में पहुंच गया। प्रारंभ...
Dr. R.K. Singh
"MARCH 2020"
Some sweet memories, some golden moments and those old friends suddenly emerged on the memory board when I entered into that sprawling campus of my alma mater IVRI. As soon as I stepped in, those two...
Dr. Rakesh Kumar Singh
"उन्नीसवीं शताब्दी का उत्तरार्ध"
भारत के रजवाड़े अंतिम सांसे गिन रहे थे और बरतानिया हुक़ूमत अपनी जड़ें जमा चुकी थी। इसी दौरान एक टीले पर अकेला बैठा वनराज दूर तक दृष्टिगोचर होते यमुना के बीहड़ों में अपने...
Dr. Rakesh Kumar Singh
पेंच टाइगर रिजर्व के परिक्षेत्र कर्माझिरी की कुंभादेव बीट के कक्ष 589 के विशाल दरख्तों से घिरे खुले मैदान में आकाश चूमती लपटें साक्षी बन रहीं थीं उस इतिहास की जो भारत के किसी भी बाघ...
The Asiatic wild dogs or the Dholes are on the verge of extinction. They may disappear from their habitat in India warned Bengaluru based Centre for Wildlife studies (CWS) in one of its reports published in February.
Dholes face local...
Dr. R.K. Singh
When the word "cheetah" falls in our ears, the image of a wild animal that is known for its amazing agility and speed automatically emerges in the mind.
Cheetahs (Acinonyx jubatus) are big cat according to their size...
Dr. Rakesh Kumar Singh
एक हल्की सी आवाज़ और बेहोशी की दवा से भरी पांच एम एल की डार्ट मेरे कंधे में अंदर तक धँसती चली गयी। अब तो ये मेरे गुस्से की पराकाष्ठा थी, मैंने आवाज़ की दिशा में...
Dr. Rakesh Kumar Singh
सात अप्रैल 2017, दिन शुक्रवार, कानपुर प्राणी उद्यान के समस्त स्टाफ में अजब सा उत्साह था, सबको उस पल की क्षण-क्षण प्रतिक्षा थी जो सभी प्राणी उद्यानों में आता तो है मगर यदा कदा। ये वो...