स्वस्थ जीवन के लिए परीक्षित प्रयोग

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डॉ उर्मिला यादव
हमारी स्वस्थता की बुनियाद हमारे दैनिक जीवन के छोटे छोटे दैनिक कार्यों पर आधारित होती है। हम आप को यहाँ पर कुछ,बहुत ही कारगर परीक्षित प्रयोग के तरीके बता रहें हैं  जिसका प्रयोग करके आप अपने दैनिक जीवन में आने वाली
समस्यायों से तो बचेगें ही एवं समस्याओं को दूर करने में भी मदद मिलेगी।

👉ताँबे के बर्तन में रखा पानी-

ताँबे के बर्तन में रखा पानी सुबह उठते बिना कुल्ला किये ही पिए,निरंतर ऐसा करने से आप कई रोगों से बचे रहेंगे।ताम्बे के बर्तन में रखा जल गंगा जल से भी अधिक शक्तिशाली माना गया हैं।

👉शौंच-
ऐसी आदत डाले कि नित्य शौंच क्रिया करते समय दाँतों को आपस में भींच कर (दबाकर ) रखे। इस से दाँत मज़बूत रहेंगे,पेट आसनी से साफ होगा तथा लकवा (पैरालाइसिस) नहीं होगा।

👉सुबह की सैर-
सुबह सूर्य निकलने से पहले पार्क या हरियाली वाली जगह पर सैर करना सम्पूर्ण स्वस्थ्य के लिए बहुत लाभदायक हैं। इस समय हवा में प्राणवायु (आक्सीजन ) का बहुत  संचार रहता हैं। जिसके सेवन से हमारा पूरा शरीर रोगमुक्त रहता हैं और हमारी रोग प्रतिरोधक शक्ति बढ़ती हैं।
👉मालिश-
स्नान करने से आधा घंटा पहले सर के ऊपरी हिस्से में सरसों के तेल से मालिश करें। इस से सर हल्का रहेगा,मस्तिष्क ताज़ा रहेगा।रात को सोने से पहले पैर के तलवो, नाभि,कान के पीछे और गर्दन पर सरसों के तेल की मालिश कर के सोयें । निद्रा अच्छी आएगी, मानसिक तनाव दूर होगा। त्वचा मुलायम रहेगी।सप्ताह में एक दिन पूरे शरीर
में मालिश ज़रूर करें ।
👉योगासन और प्राणायाम-
नित्य कम से कम 10 से 20 मिनट योगासन और प्राणायाम का अभ्यास ज़रूर करें। तन और मन स्वस्थ रहेगा। युवा जैसा महसूस करेंगें।
👉ध्यान-
हर रोज़ कम से कम 10 से 15 मिनट ध्यान ज़रूर करें,जीवन भर तनाव नहीं होगा।
👉आँवला –
किसी भी रूप में थोड़ा सा आँवला हर रोज़ खाते रहे,जीवन भर उच्च रक्तचाप और हार्ट फेल नहीं होगा।
👉मेथी-
मेथीदाना पीसकर रख ले।एक चम्मच एक गिलास पानी में उबाल कर नित्य पिए। मीठा, नमक कुछ भी ना डाले। इस से आँव नहीं बनेगी, शुगर कंट्रोल रहेगी और जोड़ो के दर्द नहीं होंगे एवं पेट ठीक रहेगा।
👉छाँछ  –
तेज और ओज बढ़ने के लिए छाँछ का निरंतर सेवन बहुत हितकर हैं। सुबह और दोपहर के भोजन में नित्य छाँछ का सेवन करें। भोजन में पानी के स्थान पर छाँछ का उपयोग बहुत हितकर हैं।
👉नेत्र स्नान-
मुँह में पानी भर कर नेत्र धोयें । ऐसा दिन में तीन बार करें।जब भी पानी के पास जाए मुँह में पानी का कुल्ला भर लें और नेत्रों पर पानी के छींटे मारें। मुँह का पानी एक मिनट बाद निकाल कर पुन: कुल्ला भर ले। मुंह का पानी गर्म ना हो,
इसलिए बार बार कुल्ला नया भरते रहे।भोजन करने के बाद गीले हाथ तौलिये से नहीं पोंछे। आपस में दोनों हाथो को रगड़ कर चेहरा व कानो तक मलें। इससे आरोग्य शक्ति बढ़ती हैं। नेत्र ज्योति ठीक रहती हैं।
👉सरसों तेल-
सर्दियों में हल्का गर्म सरसों के तेल और गर्मियों में ठंडा सरसों तेल तीन बूँद दोनों कान में कभी कभी डालते रहें इससे कान स्वस्थ रहेंगे एवं श्रवण शक्ति जीवनभर  बनी रहेगी।
👉निद्रा-
दिन में जब भी विश्राम करें तो दाहिनी करवट लेकर सोयें । और रात में बायीं करवट लेकर सोयें । दाहिनी करवट लेने से बायां स्वर अर्थात चन्द्र नाड़ी चलेगी, और बायीं करवट लेने से दाहिना स्वर अर्थात सूर्य स्वर चलेगा। भोजन आसानी से पचेगा और ठंड से बचे रहेंगें । उच्च रक्तचाप वालों को दाहिनी करवट नहीं सोना चाहिए।
👉सौंठ-
सामान्य बुखार, फ्लू, जुकाम और कफ से बचने के लिए पिसी हुयी आधा चम्मच सौंठ और ज़रा सा गुड एक गिलास पानी में इतना उबाले के आधा पानी रह जाए। रात को सोने से पहले यह पिए।बदलते मौसम,सर्दी व वर्षा के आरम्भ में यह पीना रोगों से बचाता हैं। सौंठ नहीं हो तो अदरक का भी इस्तेमाल कीजिये।
👉टाइफाइड-
चुटकी भर दालचीनी की फंकी अकेले या शहद के साथ दिन में दो बार लेने से टाइफाइड नहीं होता।
👉 नाक-
रात को सोते समय नित्य सरसों का तेल या देसी गाय का घी नाक में डालें । हर तीसरे दिन दो कली लहसुन रात को भोजन के साथ ले। प्रात: दस तुलसी के पत्ते और पांच काली मिर्च नित्य चबाये। सर्दी, बुखार, श्वांस रोग नहीं होगा। नाक स्वस्थ रहेगी।
👉हरड़-
हर रोज़ एक छोटी हरड़ भोजन के बाद दाँतो तले रखें और इसका रस धीरे धीरे पेट में जाने दे। जब काफी देर बाद ये हरड़ बिलकुल नरम पड़ जाए तो चबा चबा कर निगल लें । इससे आपके बाल कभी सफ़ेद नहीं होंगें, दांत 100 वर्ष तक निरोगी रहेंगें और पेट के रोग नहीं होंगे।
  👉चर्वाक कहते हैं – या जीवेत सुखी जीवेत,ऋणं कृत्वा घृतं पिवेत। इसका अर्थ यह हुआ,जब तक जियो सुख पूर्बक (खुशी से ) जियो,चाहे ऋण (कर्ज,उधार ) ही क्यों न लेना पड़े लेकिन घी (देसी गाय का ) जरूर खाओ। इससे रोग प्रतिरोधक क्षमता हमेशा बनी रहेगी। बीमारियाँ आपके जीवन से दूर रहेंगी। अंत में आपने तो ये तो जरूर सुना होंगा –
👉घी खाये मांस बढ़े,अलसी खाये खोपड़ी। दूध पिये शक्ति बढ़े,भुला दे सबकी हेकड़ी।।
👉 तेल तड़का छोड़ कर,नित घूमन को जाय। मधुमेह का नाश हो जो जन अलसी खायें।।
(लेखिका; योग एवं प्राकृतिक चिकित्सिका ,योग केन्द्र ,आईआईटी, कानपुर की सदस्या हैैं)

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