आलू से पॉलीथिन

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Pankaj Bajpai

डॉ.आंबेडकर इंस्टीट्यूट, कानपुर के बायोटेक्नोलॉजी तृतीय वर्ष के 3 छात्रों ने प्रयोगशाला में आलू के स्टार्च से पॉलीथीन बनाने में  सफलता हासिल की।

इसके लिए छात्रों ने आलू की कुछ खास किस्मों को अपने शोध में शामिल किया। ये किस्में थी- कुफरी बहार, कुफरी लालिमा,कुफरी चिप्सोना व डीएल-50 हाइब्रिड आलू। इन सभी आलू के स्टार्च व साबुन कंपनियों से निकलने वाले प्लाटिक साइजर के एवं कैल्शियम कार्बोनेट ,ग्लिसरॉल,सार्बिटल ,एग्गसेल,नैनो पार्टिकल आदि के मिश्रण से पालीथिन का निर्माण किया ।

इस शोध को करने के लिए हर्षित सिंह, रजत प्रताप सिंह, व हेमंत कुशवाहा ने अपने गाइड मनीष सिंह राजपूत के दिशा निर्देशन को सफलता में मुख्य सहायक बताया।

छात्रों के अनुसार इस पॉलीथिन को इस्तेमाल करने के बाद मिट्टी में दबा देने के 280 दिन के अंदर ही गल कर मिट्टी का स्वरूप के लेगी। भविष्य में यह किसानों के लिए आय का साधन बनेगी । आलू को औद्योगिक उत्पाद का दर्जा भी प्रदान करने में मील का पत्थर सिद्ध होगी अगर हम पर्यावरण की दृष्टि से देखें तो वे खोज मृदा प्रदूषण को खत्म करने में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकती है।

आये दिन पशुवों के मौत पालीथिन खाने के कारण हो जाती है,उसमें भी पूर्णतया विराम लगाने में सहायक सिद्ध ही सकती है। शहरी नगर निगम नाला ,सीवर लाइन,नालियां,आदि पालीथिन के कारण आये दिन जाम रहते है।सड़कों पर गंदगी का मुख्य कारण भी यही है। शोधकर्ता अपनी इस उपलब्धि को अब पेटेंट कराएंगे तथा वृहद स्तर पर इसके उत्पादन के लिए उत्पादकों को आमंत्रित करेंगे।