मोहब्बत की निशानी पर समय की मार…..

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Pankaj Bajpai
दुनिया के सात अजूबों में अपना स्थान बरकरार रखने वाला ताज महल रख रखाव में कमी के कारण अपनी सुंदरता को दिन प्रतिदिन खोता जा रहा है ।पत्थरों के पीले पड़ने की समस्या का कोई स्थायी हल तो निकल नहीं सका ।लगभग सभी प्रयास विफल ही साबित हुए।
सफेद से पीले होते पत्थरों से भी बड़ी समस्या अब ताज महल और उसकी मीनारों में लगी काले पत्थरों की पतली पतली पट्टियों का गिरना है ।
मोहब्बत की ये निशानी खुद ही सरकारी मसीनरी की मोहब्बत से महरूम दिखाई पड़ रही है । ताज महल की मुख्य बिल्डिंग व उसकी मीनारों में लगे काले पत्थर इन दिनों सफेद संगमरमर का साथ छोड़ रहे । सरकारी व  स्वायत्त संस्थान इसके संरक्षण में गहरी लापरवाही बरत रहे । इसके कारण ताज अपनी खूबसूरती खोता जा रहा ।ताजमहल व उसके परिसर में आए दिन संरक्षण का काम चलता रहता है।लेकिन सही तरह से देखभाल न होने के कारण इसकी खूबसूरती और मजबूती दोनों कम हो रही ।
कुछ समय पहले ताज की मीनारों का संरक्षण कार्य कराकर इसके टूटे पत्थरों को बदला गया था । पीले पड़ रहे पत्थरों को चमका दिया गया था । लेकिन मीनारों में लगे मुगलकालीन पत्थरों को सहेजने के लिए किए गए प्रयास नाकाफी साबित हुए।मीनारों में लाल रंग का रतक,हरे रंग का पितौनिया ,मद्रास से लाया गया काला और मकराना का सफेद पत्थर लगा हुआ है।सफेद पत्थरों को आकर्षक बनाने के लिए इनके बीच काले पत्थरों को तराशकर उनकी लंबी -लंबी पट्टीयां लगाई गई थीं ।
तेज गर्मी के दिनों में ये काले रंग की पट्टीयां मीनारों आदि से निकल कर गिर रही हैं । इसके कारण मीनारों  आदि में दरारें साफ देखी जा सकती हैं । रोजाना 8-10 काले पत्थरों की पट्टीयां गिर जाती हैं।इससे सुंदरता के साथ -साथ मजबूती भी प्रभावित होती जा रही।
ये काले पत्थर अपनी खास पहचान के कारण मीनार में सजाएं गए थे। सूर्य की रोशनी में मीनारों  पर लगे पत्थर चमकते है। जो ताज की सुंदरता में चार चांद लगा देते हैं ।
ताज विश्व की धरोहर है। इसका संरक्षण सभी का दायित्व है।

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