अतीत की यादों और भविष्य की संभावनाओ का नाम है जिंदगी

0
610
Dr. Kamal Musaddi

सोशल मीडिया ने हमारा क्या फायदा किया और क्या नुकसान किया नहीं जानती मगर इतना जरूर कह सकती हूं कि सूचनाओं अनुभवों और अभिव्यक्ति की शैलियों ने लोगों में एक ऐसी वैचारिक भ्रम की स्थिति उत्पन्न कर दी है जहां व्यक्ति की सोच स्थिर नहीं रह पाते वह किसी एक विचार को पकड़ता है तभी दूसरा उसके विरोध में आकर खड़ा हो जाता है उदाहरण के लिए एक कहता है आलू खाने से शुगर और मोटापा बढ़ता है तो दूसरा आलू को शरीर के लिए जरूरी बताता है दोनों के पास तर्क होते हैं और दोनों के पास उदाहरण होते हैं बिल्कुल ऐसी स्थिति वैचारिक और मना स्थिति की होती है। बचपन से सुनती आईं हू की इतिहास से प्रेरणा लेकर मनुष्य वर्तमान की नीतियां तय करता है और भविष्य को सुंदर और सहज बनाने का प्रयास करता है मगर आजकल लोग जीने की कला जीने के तरीके तनाव से मुक्ति आदि के लिए बहुत सरलता से कह देते हैं कि दिमाग में जितनी ज्यादा फाइल रखोगे उतना ही हैक होने का डर रहेगा सब डिलीट कर दो मेमोरी बॉक्स को जितना खाली रखोगे जीवन जीने में नवीनता आएगी न सोचो अतीत ना सोचो भविष्य ।

मुझे एक गीत की पंक्ति याद आ रही है आगे भी जाने ना तू पीछे भी जाने न तू जो भी है बस यही इक पल है ।मगर क्या वास्तविक जीवन में यह संभव है यह एक स्लोगन की तरह बोला और उछाला जा सकता है किंतु क्या व्यवहार में लाया जा सकता है ।हमारा अतीत हमारे जन्म और जीवन विकास का लेखा-जोखा होता है जिसमें हमारे पूर्वज हमारे माता-पिता दोस्त और उनसे जुड़े अनुभवों का दस्तावेज होता है । हम इन अनुभवों को नजरअंदाज करके अपने कर्तव्य उद्देश्य और जीवन जीने के स्वरूप का निर्धारण नहीं कर सकते हैं और ना ही भावनात्मक रूप से एक शून्य जी सकते हैं हमारी यही अनुभव हमारे भविष्य के स्वरूप को निर्धारित करते हैं हमें स्वप्न देते हैं जिन्हें पूर्ण करने के प्रयास ही हमारे वर्तमान के कर्म का निर्धारण करते हैं फिर कैसे कोई सिर्फ वर्तमान में जी सकता है । दरअसल अतीत की यादें और भविष्य की संभावनाओं का नाम ही तो है जिंदगी।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here