अकेले नहीं हो तुम

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Dr. Kamal Musaddi
अकेले  नही  हो तुम
ये सहमे  से पहाड़
मासूम  बेलें  मजबूत  ताड़
सोये  पाखी  सहमी तितलियाँ
दहकते  जंगल  भटकती  पगडंडियों
सनसनाती  बर्फीली  हवायें
आम आवाम की दुआएं
सब तुम्हारे  साथ है
तुम्हारे करोड़ों  पैर करोड़ों  हाथ है
तुम तो मौत  के साये में
जिन्दगी  के खेल खेले  हो
इस लिये ये मत समझना  मेरे भाई
कि इस कठिन  सफर मे तुम अकेले  हो।
मन्दिरों  की घन्टिया
मस्जिदों  की अजान  खास
गिरिजाघरों  की प्रार्थनाएं
गुरुद्वारों  की अरदास
सुबह के  मंत्र  शाम वन्दन
पूजा  सजदा  आरती  हवन
आशीर्वाद  मे उठे  हाथ
सब है तुम्हारे साथ
तुम तो विष पीकर भी
अमरता  के खेल खेले हो
इसलिये  यह मत समझना
मेरे भाई
कि इस कठिन  सफर  में
तुम अकेले हो।
भाई  के प्रणाम  बहन  की राखी
सूरा  के पद कबीर  की साखी
पिता  का गमछा  मा का आंचल
मीरा  की वीणा  गालिब  की गजल
पत्नी  का सिंदूर  भाभी  की चिकोटी
मुन्नी  की किलकारी  मुन्ने  की लंगोटी
दादी  का हौसला  और
बाबा  का उठा  माथ
सब है तुम्हारे  साथ
तुम तो रिश्तों  की भीड़  मे भी
बकवास  झेले  हो
इस लिये ये मत समझना मेरे भाई
कि इस कठिन  समय में
तुम  अकेले  हो।
                       जय हिंद।

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