सोशल मीडिया : कितना सच कितना झूठ

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Pankaj Bajpai

विश्व आज संचार क्रांति के शिखर को छूने को आतुर है। विज्ञान में नित नए प्रयोग कर हमारे संचार तंत्र को तेज और सरल बनाने का प्रयास किया जा रहा है।

विश्व के अन्य देशों के जैसे सूचना को गति प्रदान करने के लिए तेज इंटरनेट और उच्च कोटि की संचार व्यवस्था को प्राथमिकता के साथ स्थापित किया गया व भविष्य में सुधार के नित नए संसाधनों का उपयोग किया जाएगा।

सूचना संचार आज आपने नए प्रारूप में सोशल मीडिया के नाम से जाना जाता है।इसकी विभिन्न शाखाएं है जैसे -फेसबुक,व्हटाप्प,मैसेंजर, ट्वीटर व न्यूज़ एप्प। इन सभी माध्यमों से सूचना का आदान प्रदान बहुत आसानी से किया जा रहा है।किसी भी सूचना को एक साथ बहुत से लोगों तक भेजा जा सकता है।

इतनी उत्तम व्यवस्था को आज कुछ लोगो ने इसके द्वारा भेजी जा रही सूचना को उसकी प्रमाणिकता को ही खतरे में डाल दिया है। किसी भी घटना को किसी भी घटना से जोड़ कर समाज की समरसता को भी बिगाड़ दिया जा रहा है।

फेसबुक पर कुछ लोग देश के महापुरषों ,वैज्ञानिकों ,प्रधानमंती व राष्ट्रपति जैसे सम्मानित लोगो पर अभद्र टिप्णी करने से फेसबुक को आजादी की अभिव्यक्ति का साधन मां लिया है। अगर फेस बुक का सही से उपयोग किया जाए तो यह सबसे अच्छा साधन है सूचना तंत्र का।

Whatapp आप युवा वर्ग में खासा पैठ रखता है। इसका उपयोग अपने नोट्स को आदान प्रदान करने के बजाय वो इसके माध्यम से अश्लील चित्र और वीडियो व फेक न्यूज़ का आदान प्रदान कर रहे है। इसी तरह की फेक न्यूज़ को इस प्रकार से edit कर दिया जाता है कि कई बार साम्प्रदायिक माहौल ही खराब हो जाता है।

सरकार को सोशल मीडिया पर नियंत्रण करना बहुत जरूरी है।कुछ ऐसा निगरानी तंत्र बनाया जाए जिससे कोई भी इसका दुरुपयोग करने पर आसानी के पकड़ा जाये।और अफवाह फैलाने से रोकी जा सके। अगर सही समय पर कोई कोई उचित कदम नही लिया गया तो ,सोशल मीडिया अपनी विश्वनीयता को खो देगा।जो कि आने वाली पीढ़ी के लिए सही नही।।

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