कोरिंगा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी – दक्षिण का सुंदरवन

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Dr. Rakesh kumar singh
Dr. Rakesh Kumar Singh
एक तरफ फैला हुआ विशाल नीला समुद्र और दूसरी तरफ दूर-दूर तक फैली हुई वृक्ष की कतारें। पानी की लहरों से जूझती हुई वृक्षो की मिट्टी से बाहर निकली हुई छोटी-छोटी हवाई जड़े। जंगल को चीरता हुआ अंदर तक बहता समंदर। मछलियों, वन्य जीवों, तितलियों और पक्षियों का अद्भुत, अप्रतिम औऱ अनोखा संसार। ये हैं भारत के कोरिंगा मैनग्रोव वन।
मैनग्रोव वनों का उल्लेख आते ही बरबस सुंदवन स्मृति पटल पर अंकित हो जाते हैं। और हों भी क्यों ना, पर्यटन के मानचित्र पर मैनग्रोव वन के रूप में भारत में केवल सुंदरबन का ही उल्लेख मीलता है। परंतु कम ही लोगों को ज्ञात होगा कि लगभग 236 वर्ग किलोमीटर में फैले कोरिंगा के मैनग्रोव न केवल अपने आप में आकर्षक हैं बल्कि हमारे देश की जैव विविधता के ध्वजा वाहक भी हैं। लगभग एक वर्ष पूर्व हमें भी कोरिंगा जाने का मौका मिला। कोरिंगा वाइल्ड लाइफ सैंक्चुअरी आन्ध्र प्रदेश के ईस्ट गोदावरी जिले के काकीनाडा शहर से मात्र 20 किलोमीटर की दूरी पर है। यहाँ जाने के लिए ट्रेन से काकीनाडा पहुंचा जा सकता है। राजमुंद्री एयर पोर्ट से 70 किलोमीटर की दूरी टैक्सी से आसानी से पूरी की जा सकती है।
एयर पोर्ट से हॉटेल पहुंचते पहुंचते हमें शाम हो गयी थी। हमने रात को काकीनाडा में एक होटल में रुक कर सुबह की प्लानिंग की।। काकीनाडा स्मार्ट सिटी होने से यहाँ सभी प्रकार के होटल उपलब्ध हैं। सी फ़ूड के शौकीनों के लिए यहाँ कई रेस्टोरेंट हैं। तय प्लान के अनुसार हम सभी सुबह पाँच बजे टैक्सी से कोरिंगा के लिए रवाना हुए। रास्ते में पड़ते नारियल के पेड़ यात्रा को मनोहारी बना रहे थे। सैंक्चुअरी में प्रवेश करते ही चारों तरफ फैले मैनग्रोव के जंगल और उनकी हवाई जड़ें हमारा स्वागत कर रही थीं। गोदावरी और गौतमी नदियों के डेल्टा पर बसा  कोरिंगा जैसे हमारा स्वागत करने के लिए  बाहें पसारे था। वाटर चैनल में अंदर तक प्रवेश करता समंदर एक उत्तेजना पैदा कर रहा था। मोटर बोट के द्वारा काकीनाडा की खाड़ी तक का सफर अत्यंत रोमांचक व प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर है। चारों तरफ उड़ते पक्षियों का हुजूम और समुद्र की उठती हुई लहरें किसी भी सैलानी को बरबस आकर्षित कर लेती है। यही से काकीनाडा की खाड़ी और बंगाल की खाड़ी के बीच बना 18 किलोमीटर लंबा बालू का द्वीप दिखाई पड़ता है। यह वही द्वीप है जहां पर दुर्लभ प्रजाति के कछुए एक निश्चित समय पर हजारों किलोमीटर का सफर करके प्रजनन हेतु आते हैं।
वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर्स एवं बर्ड वाचर्स के लिए यह जगह किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां 120 से भी ज्यादा प्रकार के पक्षियों को देखा जा सकता है, जिसमें से प्रमुख है पेंटेड स्टोर्क, स्पॉट बिल्ड पेलिकन, ओरिएंटल व्हाइट आइबिस, ओपन विल स्टार्के। इसके अतिरिक्त प्रकृति ने यहाँ दुर्लभ प्रजाति के व्हाइट बैक्ड वल्चर और लॉन्ग बिल्ड वल्चर को भी संजो के रखा है। गडेरु और कोरिंगा नदियों की डेल्टा बनाती शाखायें इस वन क्षेत्र की खूबसूरती में चार चाँद लगा देती हैं। फिशिंग कैट जैसे माहिर शिकारी की भी ये पनाहगाह है। सैलानियों के लिए यहाँ बना स्काई वाक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है। हालांकि शाम होते होते हम थक चुके थे लेकिन समंदर में उठती लहरें, सन्नाटे को चीरती पक्षियों की आवाज़ें औऱ 24 प्रकार के मैनग्रोव वृक्षो की यादें अब भी हमारे मन मष्तिष्क को तरोताज़ा कर रही थीं।
सचमुच दक्षिण के ये सुंदरबन आज भी प्रकृति की वो शानदार धरोहर हैं, जिनकी कल्पना हम सिर्फ फ़न्तासी में ही कर सकते हैं।

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