Dr. Kamal Musaddi कहते हैं ज़िंदगी वो है जो अपने फैसलों पर अपने अनुसार जी जाए बाकी तो बस सामंजस्य है।क्या सच में ज़िंदगी सिर्फ वो है जो अपने फैसलों पर जी जाए ऐसा हो सकता है क्या ,क्या कोई...
Dr. Kamal Musaddi एक धमाका पुलवामा में हुआ और पूरा देश थर्रा गया।रोटी बिलखती चीत्कार करती खबरें और आक्रोशित जनमानस ।हर देश भक्त की भृकुटियों में बल और मुट्ठी में कसाव।चारों तरफ नारे जुलूस ,कैंडिल मार्च और श्रद्धांजलि सभाओं का...
Dr. Kamal Musaddi ज़िन्दगी के रंगों को देखती हूँ तो दिखती है- चार फुट छः इंच की लक्ष्मी, जो मेरे घर साफ़ सफाई करने आती है। छोटे कद की कृशकाय लक्ष्मी, तीन जवान बच्चों की माँ है। दो बेटे और...
Dr. Kamal Musaddi  'ज़िंदगी जुल्म सही,जब्र सही, गम ही सही दिल की फरियाद सही, रूह का मातम ही सही' लिखने वाले ने मन की किस परिस्थिति में ये शेर लिखा होगा,कोई भी संवेदनशील व्यक्ति इसका अंदाजा लगा सकता है क्योंकि ज़िंदगी की...
Dr.Kamal Musaddi शाम के 6 बजे थे। मैं घर के सारे काम निपटा कर वाक पर जाने की सोच ही रही थी कि बाहर पड़ोसी के बच्चे की आवाज सुनाई दी, खोलो अले कोई है खोलो...खोलो की आवाज के साथ-साथ...
Dr. Kamal Musaddi मुझे आज तक एक प्रश्न का उत्तर नही मिला कि ज़िंदगी जब पीछे मुड़कर देखती है तो सब कुछ इतना सुंदर सुखद और अच्छा क्यों दिखता है क्यों हमें वर्तमान रुलाता है और भविष्य डराता है। आज...
Dr. Kamal Musaddi बचपन से लेकर अब तक समझ में नहीं आया कि नया वर्ष आने पर इतनी ख़ुशी, इतना आनंद, इतना उत्साह क्यों होता है लोगों के मन में? होता भी है या सिर्फ दिखावा होता है या...
Dr. Rakesh Kumar Singh साल, खैर और सागौन के विशाल वृक्षों के बीच बह रही फीका और बनेली नदियों के संगम में अठखेलियां करते हाथियों का झुंड और उन्हें दूर से निहारता ग्रासलैंड में चर रहे चीतलों का समूह और...
Dr. Kamal Musaddi जब जब जिंदगी के प्रति हताशा ,निराशा और बैराग्य उत्पन्न होता है।तब-तब कुछ चेहरे,कुछ आवाजें,कुछ घटनाएं मन पर दस्तक तो देती ही हैं,दिमाग पर भी हथौड़े सी चोट करती हैं कि जब हम नही हारे तब तुम...
Dr. Kamal Musaddi हजारों वर्षों से चली आ रही एक कहावत कि औलाद बुढ़ापे का सहारा होती है। जब समाजशास्त्रियों ने परिवार को परिभाषित किया तो यही कहा "परिवार वो संस्था है जहां बच्चों का जन्म परवरिश का दायित्व और...

Recent Posts