मेरी कहानी – मेरी ज़बानी – पार्ट 2

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pankaj Vajpayee
Pankaj Vajpayee
वाङ्गमय त्रैमासिक हिंदी पत्रिका के संपादक डॉ. एम.फ़ीरोज़ खान व विकास प्रकाशन कानपुर के संयुक्त तत्त्वावधान में थर्ड जेंडर व्याख्यानमाला के अंतर्गत’सात दिवसी वेबिनार आयोजित की गयी।वेबिनार में अनेक थर्ड जेण्डर ने भाग लिया व अपनी आप बीती व्यक्त की ।

इसी शृंखला में आज अजमेर ,राजस्थान से रुद्रांशी भट्टाचार्य पाठकों और शोधार्थियों से रूबरू हुईं। रुद्रांशी ने इस कार्यक्रम में अपने जीवनानुभवों को विस्तार और बेबाक़ी से बताया । वह बार-बार समाज के दोमुँहेपन पर चोट करती रहीं साथ ही जीवन जीने का और पूरे सम्मान के साथ जीने का अधिकार सभी को है , पुरज़ोर तरीक़े से रखा ।

बच्चों को यह नहीं पता होता कि कौन क्या है इसलिए पहली दूसरी कक्षा तक कुछ भी असहज नहीं लगा मगर तीसरी चौथी कक्षा तक आते-आते वे बच्चे ही मुझे चिढ़ाने लगे थे। यहाँ समाज की समझ दाखिल हो जाती है जो कि शरीर को स्त्री या पुरुष के रूप में देखने की आकांक्षी रहती है । बचपन के इसी मोड़ पर मेरे साथ लैंगिक उत्पीड़न की घटना घटी। इस समाज में न तो बच्चे सुरक्षित हैं,न ही स्त्री और न ही थर्ड जेण्डर। यह समाज उन्हें मीठा, छक्का, हिजड़ा जाने क्या-क्या कहकर उनका उपहास उड़ाता है और यही कारण है कि परिवार पर भी एक सामाजिक दबाव बन जाता है जिससे वे ऐसे बच्चों को त्याग देते हैं ।

वर्तमान समाज में संविधान की मान्य अवधारणाओं को देखें तो हम पाते हैं कि शिक्षा और ससम्मान जीने का अधिकार सभी को प्राप्त है फिर आख़िर क्यों यह वर्ग इससे वंचित क्यों है ।दस्तावेजों में मेरा नाम रुद्रांश सिंह राठौड़ है । मैं चाहती हुँ की मेरा नाम और मेरी देह दोनों ही परिवर्तित हो जाएं , परन्तु सर्जरी के लिए और इन प्रयासों के लिए अभी मुझे एक लम्बी लड़ाई लड़नी है । मैं एम ए अंग्रेज़ी साहित्य से पढ़ाई कर रही हूँ और एक प्रोफेसर बनना चाहती हूँ । अपनी लेखनी से उन आँसुओं को भी आवाज़ देती रहती हूँ जिन्हें मैं बचपन से अकेले बहाती आई हूँ ।

समाज के किसी का नाम तय करने का कोई हक़ नहीं है और यदि वे यह कहते हैं कि हिजड़ा वर्ग मनमानी हरकतें करता है , भौंडे प्रदर्शन करता है तो उसका ज़िम्मेदार भी यह समाज ही है । समाज को ज़्यादा कुछ नहीं करना है बस अपनी मानसिकता बदलनी है पर अफ़सोस कि सदियों से वह यह नहीं कर पाया है । मैं, मानोबी बंदोपाध्याय, लक्ष्मीनारायण त्रिपाठी जी जैसे प्रेरक व्यक्तित्वों को अपना आदर्श मानती हूँ साथ ही हर तरह जूझकर प्रोफेसर बनने का ख़्वाब रखती हूँ। मैं समर्थ बनना चाहती हूँ ताकि इस वर्ग की बेहतरी के लिए प्रयास कर सके ।।

प्रस्तुति – पंकज बाजपेई

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